चार मिसरे समाद फरमाएं-
हमने जो ख्वाब थे सजा डाले-
देख लो-वक़्त ने मिटा डाले।
आरजू अब सुपुर्दे-खाक करो-
मैंने सारे वो ख़त जला डाले.