आटोग्राफ
मैंने
सूखे, हरियाली विहीन
धुप में शान से सर उठाये खड़े
पहाड़ के चित्र पर हस्ताक्षर कर दिए-
अपने आटोग्राफ की तरह-
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जागा हूँ फक्त चैन से सोने के लिए
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आज शनिवार की रात है तारीख: फरवरी २५, सन २०१२.
अच्छी नींद लेना मूल अधिकारों में से एक- सुप्रीम कोर्ट
यही खबर थी जो आजतक के आज के ट्रिकर पर चल रही थी. त...
2 दिन पहले

theek likha hai ,paharo ka yahi yatharth hai
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपकी पोस्ट की चर्चा कृपया यहाँ पढे नई पुरानी हलचल मेरा प्रथम प्रयास
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुंदर । आपके हस्ताक्षर पहाढों की ऊँचाइयाँ ऐसे ही छूते रहें ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप भी चले आयें ब्लॉगर मीट में नई पुरानी हलचल
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