मंगलवार, 21 जुलाई 2009

समलैंगिकता और समाज
समलैंगिकता को कानूनी जामा मिलने के बाद हर आम आदमी के मन में उठने वाले सवालों के उत्तरों में आज के उत्तर -आधुनिक हो रहे समाज की कड़वी सच्चाई और घिनौना चेहरा छुपा है.
हमारी प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था में कभी कभी बहुत विद्रूपित और अव्यावहारिक बातें देखने मिलती हैं. समलैंगिकता का मसला भी ऐसा ही मसला है. इस फैसले के आने के बाद समाज के जिस "विशेष वर्ग" को राहत पहुंचाने की बात की जा रही थी उसकी प्रतिक्रया तो नहीं मालूम, पर सामान्य रूप से स्कूल कॉलेज के छात्रों में हंसी-मज़ाक, एक दुसरे को छेड़ने और निरर्थक वार्तालाप के विषय के रूप में नया मसाला ज़रूर मिल गया है. समलैंगिकता एक महामारी के रूप में फैलने की चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं पर मुझे लगता है की ये एक महामारी को फैलाने में मददगार होगी. वह महामारी है-ऐड्स. इस फैसले के साथ ऐड्स की आशंकाओं को नज़र-अंदाज़ किया गया है.
हमारे देश में गंभीर और रोंगटे खड़े करने वाली समस्याओं के आसान, मासूम से, और घोर अवैज्ञानिक-अव्यावहारिक समाधान सुझाए जाते हैं. पिच्छले कई वर्षों से ऐड्स की रोकथाम के लिए प्रसारित होने वाले सरकारी विज्ञापन कंडोम के विज्ञापन अधिक लगते हैं. स्थिति ये है की स्कूली बच्चे भी ऐड्स की भयावहता से बेखबर होते हुए कंडोम की सुरक्षा से निश्चिंत हैं. नतीजा वही है जो होना चाहिए था- तमाम प्रयासों के बा-वजूद ऐड्स के रोगियों की संख्या में तेज़ी से बढोत्तरी.
ऐड्स के विज्ञापन में कंडोम की वकालत करने वाले मूर्खों ने देश की स्वस्थ, जीवंत और संभावनाशील पीढी को किस गर्त में धकेल दिया है-!
ऐड्स के प्रति जागरूकता लाने के पक्षधर यदि भारतीय संस्कृति की चारित्रिक शुचिता को पढ़-समझ लेते और उसे व्यावहारिक बनाते तो आज हम ऐड्स के भय से मुक्त स्वस्थ समाज में रह रहे होते-!
और ..........................
उस पर नीम चढा करेला ये की समलैंगिकता भी अब गैर-कानूनी नहीं ....... यानी विदेशी ३-एक्स फिल्मों और इन्टरनेट से प्राप्त ज्ञान के आधार पर नयी रोमांचकता की तलाश में बीमार समाज के निर्माण की गति को तीव्र करने की सार्थक पहल-!!!!!!!
समलैंगिकता को भले ही गैर-कानूनी न माना जाए पर ये अ-सामाजिक और अप्राकृतिक तो है ही......... इसे एक बुराई के रूप में ही देखा जाना चाहिए. इसे कितना ही वैधानिक बनाने की कोशिश की जाए पर समय और समाज इसके पक्ष में कभी नहीं होगा.
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2 टिप्‍पणियां:

  1. अप्राकृतिक तो है ही-ये बिल्कुल सही कहा. विचारणीय आलेख.

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  2. हमारी सरकार भी अजीब-अजीब तरीके ईजाद करती है-- एड्स के लिए क्न्डोम, बच्चे न होने के लिए देर रात तक दूरदर्शन-- जिससे पुरुष महिला के दूर से ही दर्शन कर लें और सो जाएं:)

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