शुक्रवार, 14 नवंबर 2008

लघुकथा :

नींद


उनके घर पुत्री जन्म का समाचार सुन कर मैं उन्हें बधाई देने जा पहुंचा-
................ मैंने देखा- नवजात कन्या चैन से सो रही है और उसके माता-पिता की आंखों से नींद उड़ने लगी है..........
(रचना- ०३-०५-१९९५)

4 टिप्‍पणियां:

  1. आनन्‍द कृष्‍ण जी
    लघुकथा बहुत ही श्रेष्‍ठ है। मैं भी आज ही लघुकथा के बारे में ही चिंतन कर रही थी कि लघुकथा अधिक पठनीय होती है। मैंने अपने ब्‍लाब पर आपको जोड़ लिया है।
    अजित गुप्‍ता

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  2. आनन्‍द कृष्‍ण जी,
    aapki kavita me bhut gahrai he.

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